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In information warfare, perception is the battlefield.

If the news damages Pakistan — true or false — amplify it. Post it. Share it. Make it viral. Let panic spread across the border.

If the news harms India — even if true — bury it. Suppress it. Disarm it before it spreads.

This is not journalism. This is war. Psychological warfare matters.

Every post is a bullet.

Never fire one at your own country.

Jai Hind 🇮🇳
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वामपंथियों की एक रणनीति है कि जब वे कमजोर पड़ेंगे तो आपसे कहेंगे कि आप कितने अच्छे और नैतिकतावादी हो, अहिंसक और घृणा नहीं करने वाले हो, आप लड़ाई से दूर रहने वाले हो। ऐसा कहकर वह आपको रणभूमि से अलग थलग करने का प्रयास करते हैं ताकि उन्हें अपना खेमा मजबूत करने का समय मिल सके और उनका नुकसान कम से कम हो।

जैसा की हम देख रहे हैं कि कुछ नए नए साहित्यिक मीडियाई मुल्ले युद्ध को सेलिब्रेट करने के लिए लोगों को धिक्कारने में लगे हैं। मित्रों गिल्ट में मत आना, यह उनकी चाल है। याद रखिए, हम लोग युद्ध को सेलिब्रेट करते हैं, दशहरा, दीवाली नवरात्र सभी तो युद्ध के उत्सव मनाने के विषय हैं। होली इसलिए मनाते कि हिरण्यकशिपु का पेट फाड़ दिया गया था। हमारी पवित्र गीता युद्ध के दौरान ही कही गई। बुराई से युद्ध करना और सत्य की विजय के साथ हमारा सेलिब्रेशन शुरू हो जाता है।


हम युद्ध को सेलिब्रेट करेंगे।


युद्ध को शुरू आतंकवादियों ने किया है, हमने खूब कोशिश की कि वार्ता के माध्यम से युद्ध की नौबत न आए लेकिन अब कोई विकल्प नहीं, अब युद्ध को खत्म सुदर्शन चक्र ही करेगा।

युद्ध के दौरान वीर हुंकार भरते हैं और शृंगाल रोते हैं। आज के शृंगाल और इनकी मादाएं फेंकी गई बोटी पर रुदन के स्वर निकालती हैं। इन बिकी हुई लीचड़ मादाओं और गिलमें आदमियों के नाम नोट करके रखिए। देश के विरुद्ध बने ढाई मोर्चे के आधे हिस्सेदार हैं।

जय हिंद

@Hindu
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यह बात साफ़ समझनी चाहिए , लद्दाख न तो स्टेटहुड डिज़र्व करता है और न ही 6th Schedule का विशेषाधिकार।
कारण बिल्कुल सरल हैं, आंकड़े अपने आप बोलते हैं।

लद्दाख की आबादी मात्र 3 लाख है। तुलना के लिए, अहमदाबाद में कोल्डप्ले के एक कंसर्ट में ही करीब 1 लाख 30 हजार लोग पहुंचे थे। यानी जितने लोग एक इवेंट में आ जाते हैं, उतने से ढाई गुने लोग पूरे लद्दाख में रहते हैं।
अब ज़रा सोचिए, क्या 3 लाख लोगों का इलाका एक राज्य कहलाने लायक है? यह तो मुश्किल से एक बड़े शहर का जिला भर बनता है।

2023-24 में लद्दाख ने कुल 116 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया।
इसके मुकाबले केंद्र सरकार से उन्हें मिला बजट, 6000 करोड़ रुपए।
यानी उनकी कमाई से 60 गुना ज़्यादा!
जो क्षेत्र खुद अपने खर्च का 2% भी नहीं निकाल पा रहा, वो किस हक से और ज़्यादा सुविधाएँ मांग रहा है?

अब आते हैं 6th Schedule की मांग पर,
इसका मतलब होगा कि लद्दाख में कोई बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकेगा, माइनिंग या इंडस्ट्री नहीं लगा सकेगा,
और वहां के मिनरल्स व मेटल्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
अरे भाई, मुंबई जैसी जगह में जहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं है, वहाँ कोई भी देशवासी जाकर घर या दुकान खरीद सकता है,
लेकिन लद्दाख, जहाँ चारों तरफ़ खाली ज़मीन फैली है, वहाँ सिर्फ़ 0.02% लद्दाखी ही भारत के 1.8% हिस्से पर अधिकार चाहते हैं!

भारत के बाकी हिस्सों की हालत देखिए,  महाराष्ट्र में उद्योगों से प्रदूषण बढ़ रहा है, कर्नाटक के कई इलाकों में पानी पीने लायक नहीं बचा, फिर भी ये राज्य अपने टैक्स से देश का पेट पाल रहे हैं। उनसे पैदा हुआ रेवेन्यू लद्दाख तक पहुँचता है,
और वहाँ के लोग उसे “हक़” कहकर भुनाना चाहते हैं।
Opportunity cost जैसी कोई चीज़ भारत में मानी ही नहीं जाती,
“जो मेरा है, वो मेरा है,
और जो तुम्हारा है, वो भी हमारा है।”

असल में होना तो यह चाहिए कि,
अगर किसी इलाके में उद्योग या माइनिंग की अनुमति नहीं है,
तो ऐसे इलाकों को दूसरे राज्यों से जनरेट हुए टैक्स रेवेन्यू का हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। यह बराबरी का नहीं, बल्कि ज़बरदस्ती का वितरण है।

ये “सुरक्षा” आखिर किसकी हो रही है?
क्या उन युवाओं की, जो मेट्रो शहरों में PG के छोटे से कमरे में दो और लोगों के साथ रहते हैं,
दिनभर काम करते हैं, टैक्स भरते हैं ताकि ये देश चल सके?
नहीं!
ये सुरक्षा दी जा रही है उन लोगों को, जो खुद को “स्पेशल” और “यूनिक” कहकर अलग क्लब बनाना चाहते हैं।

लद्दाखियों की नौकरियाँ कोई छीन नहीं रहा।
सच तो यह है कि 10,000 फीट की ऊँचाई पर काम करने कोई शौक से नहीं जाता, मजबूरी में जाता है।
फिर भी वहाँ के लोग “बाहरी” कहकर उन्हें रोकना चाहते हैं।
यानी, फ्रीबीज़ के लिए लड़ाई, मेहनत नहीं,
और सोनम वांगचुक जैसे लोग एक एक्सक्लूसिव क्लब बनाना चाहते हैं, जहाँ हम बाकी भारतीय सिर्फ़ स्पॉन्सर होंगे, सदस्य नहीं।

भारत एक है।
सुविधाएँ, अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ , सबके लिए समान होने चाहिए।

जो खुद के दम पर खड़ा नहीं हो सकता, उसे विशेषाधिकार नहीं, आत्मनिर्भरता की सीख चाहिए।



# राष्ट्र_प्रथम
# भारत_पहले


@Hindu
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मेरी उम्र 54 वर्ष है और मैने 4 वर्ष की उम्र में पढ़ना सीखा था.. यानि पिछले पचास वर्षों से पढ़ रहा हूं कि दुनिया नष्ट होने वाली है.

बचपन में इंद्रजाल कॉमिक्स पढ़ते थे जिसके पिछले कवर पर कार्टून बनाकर बताया जाता था कि दुनिया में सिर्फ अगले पंद्रह वर्षों के इस्तेमाल के लायक पेट्रोल बचा है. तब से आज पेट्रोल की खपत कई गुना बढ़ी है और दुनिया में उपलब्ध पेट्रोलियम की मात्रा भी कई गुना बढ़ी है.

और तब से सौ साल पहले एक अंग्रेज इकोनॉमिस्ट लिख रहे थे कि दुनिया के पास उपलब्ध कोयला समाप्त होने वाला है और हमें एनर्जी की खपत को कम करना चाहिए नहीं तो सिविलाइजेशन का चक्का रुक जाएगा.

पहला विश्व पर्यावरण समिट 1972 में हुआ था जब पर्यावरण विशेषज्ञ बता रहे थे कि दुनिया में अगला आइस एज आने वाला है.. . क्योंकि उसके पहले के दस वर्षों में तापमान में कुछ कमी देखी गई थी. टाइम मैगजीन की हेडलाइंस थी Another Ice Age. फिर तापमान बढ़ा तो ये ग्लोबल वार्मिंग चिल्लाने लगे.

सच यह है कि कुछ लोग हैं जिनकी आजीविका है यह चिल्लाना कि सबकुछ पहले से खराब हो रहा है, नष्ट होने वाला है... जबकि मालूम उनको घंटा कुछ नहीं होता. दुनिया का तापमान और क्लाइमेट बदलता रहा है और बदलता रहेगा. पिछला आइस एज सिर्फ 12000 वर्ष पहले आया था, जबकि धरती पर मनुष्य लाखों वर्षों से है और वह कोई कारें और हवाई जहाज नहीं चला रहा था. फर्क सिर्फ इतना है कि आज आर्थिक प्रगति के कारण हम बदलते हुए क्लाइमेट में सरवाइव करने के लिए अधिक सक्षम हैं और कम प्रभावित होते हैं. सर्वाइवल की कुंजी आर्थिक प्रगति है ना कि क्लाइमेट से युद्ध, जो आप कभी जीत ही नहीं सकते. उससे जीतने का सिर्फ एक उपाय है.. आर्थिक और तकनीकी प्रगति.

और इस आर्थिक और तकनीकी प्रगति के मूल में है ऊर्जा के स्रोत. यांत्रिक ऊर्जा ने मनुष्य को दासता से मुक्त किया है. और जो गैंग इस पर्यावरण की हिस्टीरिया के मूल में है उसकी सिर्फ एक ही समस्या है - मनुष्य स्वतंत्र क्यों है? वह उनकी क्यों नहीं सुनता? मनुष्य की दासता ही उसका मूल उद्देश्य है. और इसलिए वे यांत्रिक ऊर्जा के सभी सोर्सेज को नियंत्रित और नष्ट करना चाहते हैं. पूरा का पूरा पर्यावरण का हल्ला ही इसी का बहाना भर है.

और इसके लिए बच्चे हमेशा सबसे अच्छा टारगेट हैं. क्योंकि हम और आप तो "दुनिया दस सालों में नष्ट हो रही है" पिछले पचास सालों से सुन रहे हैं... यह पैनिक बच्चों में ही पैदा किया जा सकता है. इसलिए अपने बच्चों को इस एनवायरनमेंट न्यूरोसिस से मुक्त कीजिए... उन्हें जम कर पटाखे चलाने दीजिए... क्योंकि धरती पर मनुष्य का जीवन हीं एक उत्सव है.


दीपावाली की हार्दिक शुभकामनाएं🙏



@Hindu
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🙏 सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

सूर्य भगवान और माता छठी मइया की कृपा आप पर सदा बनी रहे।

@Hindu
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किसी भी क्षेत्र में सफलता के सात गुण

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सफलता पाना चाहता है, वह चाहे नौकरी करने वाला हो या व्यापारिक क्षेत्र में कार्य करने वाला हो, वह चाहे डाक्टर हो, इन्जीनियर हो या कोई अन्य व्यवसाय में संलग्न हो, प्रत्येक व्यक्ति की यह आकांक्षा होती है कि वह अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त करे, पूर्णता प्राप्त करें और ऊंचाई पर पहुंचे।

इसके लिए वे भरसक प्रयत्न भी करते है, पर यह आवश्यक नहीं कि उन्हें सफलता ही मिले, प्रयत्न करने के बावजूद भी व्यापार नहीं बढ़ पाता या नौकरी में प्रमोशन नहीं हो पाता, या आर्थिक उत्सति में सफलता नहीं मिल पाती, इसके लिए समाज विज्ञानियों ने सफलता के सात गुण बताये है, जिनको अपनाने पर निश्चय ही, आप अपने क्षेत्र में सफलता पा सकते हैं।

१- हमेशा सुसज्जित रहिये, आपका व्यक्तित्व ही आपकी पूंजी है, दूसरों के सामने आपका व्यक्तित्व ही यापको सफलता प्रदान करेगा, अतः जब घर से बाहर निकले तब शीशे में अपने आप को देख ले कि क्या आप सभी दृष्टियों से सुसज्जित है।

२- हमेशा अपने से उच्च स्तर के व्यक्तियों से वे सम्पर्क स्थापित कीजिये, जो सामान्य की अपेक्षा एक उच्च स्तर का व्यक्ति ज्यादा सहायक हो सकता है, और आपको आगे बढ़ाने में अनुकूलता प्रदान कर सकता है।

कंजूस मत बनिये, जहां पर जितना व्यय करना पड़े जरूर करिये इस बात का ध्यान रखिये कि मित्रता निभाने में त्यागवृत्ति आवश्यक होती है।

४- सर्वथा क्रोध रहित रहिये, सामने वाला कितना ही उत्तेजित हो आप अपने आप पर पूरा नियन्त्रण रखिये, आपकी यह अक्रोधता ही आपको सफलता प्रदान करेगी।

५- व्यसनों से सर्वथा दूर रहिये और किसी भी प्रकार के व्यसन के गुलाम मत बनिये, इससे आपका व्यक्तित्व निखरेगा ।

- नित्य एक नवीन मित्र बनाइये, आप अनुभव करेने कुछ ही दिनों में आपके पास
मित्रों की एक काफी बड़ी संख्या हो गई है।

७- किसी भी क्षेत्र में पूर्ण सफलता पाने के लिए "सिद्धि साधना" सम्पन्न करिये, "सिद्धि साधना यन्त्र" या "गुरु यंत्र" के सामने नित्य एक माला मन्त्र जाप निम्न मन्त्र का करिये-

मन्त्र

ॐ मणिभद्रे हूं।

आप स्वयं अनुभव करेगे कि आप प्रत्येक क्षेत्र में सफलता की ओर अग्रसर है।


@Hindu
48🔥6😁4🙏3
निशानियां identities

But

दुश्वारियां difficulties


आप दीपावली के आतिशबाज़ी मे भी सकुचाते रह जाओगे और वे RDX जुटाकर रख भी लेंगे।

#0.5_front

@Hindu
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प्रेम कोई संबंध नहीं, यह तो एक आंतरिक सुवास है।
यह तब जन्म लेता है जब भीतर की चुप्पी फूल बनकर खिल उठती है।

सच्चे प्रेम में न माँग होती है, न अपेक्षा—वहाँ केवल देना होता है।

प्रेम वह ऊर्जा है जो तुम्हें भीतर से हल्का कर देती है, जैसे किसी ने आत्मा पर से बोझ हटा दिया हो।
जब मन शांत और हृदय खुला होता है, प्रेम अपने आप बहता है।

प्रेम किसी दूसरे के लिए नहीं, पहले अपने भीतर की पूर्णता के लिए होता है—और तभी वह सचमुच दूसरों तक पहुँचता है।

प्रेम का अर्थ है—खुद को इतना संपूर्ण कर लेना कि तुम्हारी उपस्थिति ही एक आशीष बन जाए।

🪷
@Hindu
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काशी ने एक ऐतिहासिक और दिव्य क्षण का आनंद अनुभव किया— ऐसा क्षण जिसे सनातन समाज में सर्वत्र प्रचारित किया जाना चाहिए।
जहाँ आधुनिक भारत के तेजस्वी वेद-तेज का उदय हुआ—
देवव्रत महेश रेखेअहिल्यानगर,महाराष्ट्र)
के भव्य अभिनंदन समारोह के रूप में।

सिर्फ19वर्ष की आयु में इस दिव्य प्रतिभा ने
दण्डक्रम वेद पारायण के अंतर्गत
🔱 25 लाख से भी अधिक पदों का
🔱 लगातार 50 दिनों तक
🔱 बिना किसी ग्रंथ का सहारा लिए, एक भी त्रुटि के बिना
उच्चारण कर सनातन वेद परंपरा का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया है।

इस पावन क्षण में
पूज्य डॉ.दिव्यचेतन ब्रह्मचारी गुरुजी की पावन उपस्थिति में
🌺 चांदी की हनुमान चालीसा
🌺 प्रभु श्रीराम का दिव्य विग्रह
🌺 माँ भगवती के प्रसाद स्वरूप चंदन-इत्र
समर्पित कर उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त,श्रृंगेरी शारदा पीठ के
जगद्गुरु श्री शंकराचार्य जी की ओर से
🌟 स्वर्ण कड़ा
🌟 ₹1,00,000 की आशीर्वाद-राशि
भेंट की गई —
जो इस अद्भुत युवक की साधना, वेदनिष्ठा और अनुशासन की सर्वोच्च पुष्टि है।

यह सम्मान किसी एक साधक का नहीं,
बल्कि सनातन वेद संस्कृति के पुनरुत्थान का वैश्विक उद्घोष है।

🚩🚩 हर हर महादेव 🚩🚩

@Hindu
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काशी ने एक बार पुनः अपना वैशिष्ट्य प्रमाणित किया है। एक प्रतिभाशाली वैदिक छात्र ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिनीय शाखा के चालीस अध्यायों का दण्ड क्रम पारायण पूरा किया है।

यह पारायण वेद के विकृति-पाठ के अन्तर्गत किया जाता है। यहाँ यह जानने योग्य है कि वेद मन्त्र और अर्थ के विशिष्ट विज्ञान में नियोजित हैं। इस कारण वेदों को छः अंगों में प्रबन्धित किया हुआ है, वे छः अंग शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द तथा ज्योतिष हैं। ये अंग वेद के शुद्ध उच्चारण, उसकी लयात्मकता एवं उसमें निहित प्रयोग विधि का निर्दोष व्यवहार सुनिश्चित करते हैं। वेदार्थ के अनुसन्धान की ही भाँति वेदों का समुचित पाठ भी विशिष्ट ज्ञान द्वारा ही सम्भव होता है।

वेदपाठ की दो मुख्य पद्धतियाँ हैं, पहली पद्धति है प्रकृति और दूसरी पद्धति है विकृति। प्रकृति-पाठ के तीन भेद हैं - संहिता, पद तथा क्रम । विकृति-पाठ के आठ भेद हैं - जटा, माला, शिखा, रेखा, ध्वज, दण्ड, रथ एवं घन।

जटा माला शिखा रेखा ध्वजो दण्डो रथो घनः।
अष्टौ विकृतयः प्रोक्ताः क्रमपूर्वा महर्षिभिः॥

मन्त्रद्रष्टा ऋषियोँ की भाँति इन पाठभेदों के भी भिन्न-भिन्न ऋषि बताये गये हैं। वेदपाठ के माहात्म्य को भी इन पाठ-पद्धतियों के आधार पर निरूपित किया गया है। दण्डक्रम का परिचय देते हुए कहा गया है-

क्रममुक्ता विपर्यस्य पुनश्च क्रममुत्तमम्।
अर्द्धर्चादेव मुक्तोयं क्रमदण्डोऽभिधीयते॥

अर्थात् अनुक्रम से दो पदों के पाठ के बाद व्युत्क्रम से क्रमशः एक-एक पद का पाठ बढ़ाते हुए आधी ऋचा तक यह पाठ चलता है। क्रम के पश्चात् व्युत्क्रम, पुनः क्रम तत्पश्चात् उत्तर पद क्रम। यह आधे-आधे मन्त्र का किया जाता है । उदाहरण के लिए देखें-

ओषधयः सम्। समोषधयः।

ओषधयः सम् । सं वदन्ते । वदन्ते समोषधयः।

ओषधयः सम्। सं वदन्ते। वदन्ते सोमेन। सोमेन वदन्ते समोषधयः।

ओषधयः सम्। सं वदन्ते। वदन्ते सोमेन। सोमेन सह। सह सोमेन वदन्ते समोषधयः।

ओषधयः सम्। सं वदन्ते। वदन्ते सोमेन। सोमेन सह। सह राज्ञा। राज्ञा सह सोमेन वदन्ते समोषधयः।

ओषधयः सम्। सं वदन्ते। वदन्ते सोमेन। सोमेन सह। सह राज्ञा। राज्ञेति राज्ञा।

उत्तरपद क्रम -

यस्मै कृणोति। कृणोति यस्मै।

यस्मै कृणोति। कृणोति ब्राह्मणः। ब्राह्मणः कृणोति यस्मै।

यस्मै कृणोति। कृणोति ब्राह्मणः। ब्राह्मणस्तम्। तं ब्राह्मणः कृणोति यस्मै।

यस्मै कृणोति। कृणोति ब्राह्मणः। ब्राह्मणस्तम्। तं राजन्। राजंस्तं ब्राह्मणः कृणोति यस्मै।

यस्मै कृणोति कृणोति ब्राह्मणः। ब्राह्मणस्तम्। तं राजन्। राजन् पारयामसि। पारयामसि राजंस्तं ब्रह्मणः कृणोति यस्मै।

यस्मै कृणोति। कृणोति ब्रह्मणः। ब्राह्मणस्तम्। तं राजन्। राजन् पारयामसि। पारयामसोति पारयामसि॥

पचास दिनों में इस संहिता की 1975 कण्डिकाओं के 3988 मन्त्रों का कण्ठस्थ पाठ सम्पन्न करने वाले ब्रह्मचारी हैं श्री देवव्रत महेश रेखे। संस्कारशील वेदाध्यायी पिता के पुत्र श्री रेखे काशी में वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय के छात्र हैं। उनका यह कार्य वैदिक शिक्षा एवं उसमें निहित अनुशासन का प्रमाण बना है। इस पारायण ने उन्हें प्रभूत यश दिया है। वे इसके पात्र हैं। माननीय प्रधानमन्त्री ने उनके इस कार्य की सराहना की है। मुख्यमन्त्री जी ने उन्हें सम्मानित किया है। एक अच्छे विद्यार्थी का रूप समाज के सम्मुख आया है। कुल मिलाकर यह आनन्द और आशा का संचार करने वाला प्रसंग है।

तथापि, इस अहोरूपमहोध्वनिः के बाद यह सोचना बाकी रह जाता है कि वेद क्या केवल पाठ है ? लक्षात्मक वेद के कुछ हज़ार मन्त्रों का व्यवस्थित अध्ययन हो जाने पर भी यह एक व्यक्ति की उपलब्धि से अधिक कैसे चरितार्थ होगा। हमारा संविधान, हमारी सरकारें और हमारा समाज वेद को एक कुतूहल से अधिक कितना समझ पा रहा है। जागरूक लेखक Sarvesh जी ने इस सन्दर्भ की सराहना करते हुए बड़ी सच्चाई से लिखा है कि "उन्नीस साल के उस किशोर ने क्या उपलब्धि प्राप्त की है, यह स्पष्ट नहीं समझ पाया हूँ।" धर्मप्राण भारत देश अपना मूल वेदों में कहता है - 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' फिर भी यहाँ बहुसंख्य जन वेदों से अपरिचित ही हैं।

सोशल प्लेटफार्म पर इस अवसर का उत्सव दिखाई दे रहा है, bro और guys वाली लॉबी भी मगन है। यह सब प्रतीकात्मक रूप से तो अच्छा है, पर क्या हम वास्तव में किसी वैदिक युग में प्रवेश कर रहे हैं। श्रुति-स्मृति-पुराणेतिहास का अध्ययन-अध्यापन क्या हमारी सरकार अंगीकार करने जा रही है। स्वातन्त्र्य-पूर्व से कुल-परम्परा को नष्ट करने हेतु प्रतिबद्ध हमारी सामाजिक चेतना क्या गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने को प्रस्तुत है। इस दण्डक्रम पारायण से जगे हुए उत्साह को देखकर यह झाग बैठ जाने की ओर भी ध्यान जाने लगता है।
20🔥3
दोयम दर्जे के नागरिक हुए संस्कृत छात्र, गाली की भाँति अपने कुलीन आस्पद ढोते ब्राह्मण, पीढ़ियों से कपट और गैरबराबरी के षडयन्त्र का अपमान सहते पण्डित क्या किसी स्वर्णयुग में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस समय प्रचलित दावे के अनुसार जो पारायण सौ-दो सौ सालों में एक बार सम्भव हुआ है, उससे वैदिक युग पुनः आने वाला है क्या।

मुझे लगता है, यह विद्यार्थी की मेधा का उत्सव है। यह एक पुण्यशील माता-पिता की सिद्धि है। यह एक योग्य आचार्य का आशीर्वाद है। यह आश्वस्ति है कि बीज का नाश नहीं होता, पर बीज के दाने से भण्डारा नहीं होता। उसके लिये खेती और अच्छी उपज की अपेक्षा होती है और अनुकूल ऋतु की भी।

इण्टरनेट की हाइप और सोशल मीडिया अल्गोरिदम के छलावे के बाद, मुकुट और माला की चित्रावलियों के बाद इस प्रसंग की फलश्रुति क्या होगी। यह अप्रतिम छात्र जब अपने रटे हुए मन्त्रों के अर्थ समाज-जीवन में खोजने निकलेगा तो उसे क्या मिलेगा। जातीय जनगणना कराती सरकारें, जातिवाद मिटाने को संकल्पित संविधान, जन्मगत श्रेष्ठता को अमान्य करता समाजशास्त्र तथा कुल-गोत्र को निरस्त करते लोगों के बीच इस उत्साह की कोई वास्तविक भूमि भी है क्या।

सोचना चाहिए।

बधाई हो आयुष्मान् देवव्रत महेश रेखे, हमें इस पारायण में उपस्थित होने का आग्रह था, इच्छा भी थी पर सम्भव नहीं हुआ। पुनः बधाई..धर्मशील माता-पिता और यशस्वी गुरु भी वन्दनीय हैं।

इस उल्लास की अर्थवत्ता का विचार हो सके इसकी शुभकामना। प्रतीकात्मक स्वागत से आगे बढ़कर इस परम्परा की प्रतिष्ठा हो सके ऐसी आशा।

@Hindu
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How a Photo Explains the Entire Logic of Idol Worship

When people question the purpose of mūrti-pūjā (idol worship), they often assume it is superstition. Yet for millions of seekers, the image becomes a bridge—something that anchors the mind and brings the unseen closer. In this powerful scene from Bharat Ek Khoj, Swami Vivekananda explains how even a simple photograph of a king evokes respect, not because the paper is special, but because of what it represents. The picture is not the king, yet it stands for him—and through that representation, reverence naturally arises.

In the same way, a devotee honors a mūrti because it offers a focal point for devotion, attention, and inner stillness. Symbols guide the heart, helping it remember what the eyes cannot see.

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श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏

जय श्री राम! जय सियाराम
आज पूज्य श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का द्वितीय पावन वर्षगांठ का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इस दिव्य अवसर पर प्रभु राम की कृपा से अयोध्या में रामराज्य का स्वरूप और भी निखर रहा है।यह पावन क्षण असंख्य भक्तों की श्रद्धा, संकल्प और त्याग का प्रतीक है।

सभी राम भक्तों को हार्दिक बधाई! जय जय राम! 🕉️ 🚩


@Hindu
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Celebrating the victory of Hindu Civilisation and defeat of the Ghazni Mindset.

Firecrackers at Somnath Temple in Gujarat immediately after Omkar Mantra Ucharan and Drone Show!

Har Har Mahadev!

@HINDU
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This is Bharat (India) ,Here when a New Baby is Born from Gaumata (Cow)

The moment is filled with happiness, celebration and peace with Pooja for the newborn and Mother..😊

May She Receive the best health and all Blessings Of Krishna🥰


@Hindu
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Our roots in history, our eyes on the future.

Jai Hind
🇮🇳

@Hindu 🇮🇳 Happy Republic Day
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