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Urgent Hiring – Garment Export Company (Greater Noida)

We are a leading Garment Export Company based in Greater Noida and are urgently looking for experienced candidates for the following positions:

*1. Fabric Manager*
• Salary: ₹60,000 – ₹75,000 per month
• Experience: Relevant experience in garment export industry required

*2. Accounts Executive*
• Salary: ₹30,000 – ₹40,000 per month
• Experience: 3–5 years (preferably in garment/export industry)

*3. Quality Assurance (QA)*
• Salary: ₹50,000 – ₹55,000 per month
• Experience: 10–15 years in garment quality (export house preferred)

*4. Store In-Charge*
• Salary: ₹50,000 – ₹60,000 per month
• Experience: Relevant experience in garment stores/inventory management

*Location: Greater Noida*
Joining: Immediate / Urgent

Interested candidates may apply by sending their updated CV to hr@deltamanpower.com or via WhatsApp at 96253 66174.

No calls please.
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UP का CM कैसा हो... अलंकार अग्निहोत्री जैसा हो 👍👍

2027 के लिए इन्हे मेरा पोर्न समर्थन

* पोर्न को पोर्न ही पढ़ा जाए 😂😂
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योगी जी ने तो छील दिया सपा वालों को 🤣🤣
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नमन 🙏🙏🙏

Never Forgive, Never Forget 🙏
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Rahul met Congress workers disguised as Farmers!
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Rolls-Royce Offers Engine Collaboration Beyond AMCA, Signals Interest in Kaveri 2.0 Revival
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हाँ तो update यह है कि ग़ाज़ियाबाद गैंग के हिसाब से रूचि त्रिपाठी के साथ भीम आर्मी के लोगों ने जो बदतमीजी की.. उसके दोषी भी मोदी हैं.

13 जनवरी 2026 से पहले तो कोई भेदभाव था ही नहीं..... लेफ्ट, right, अम्बेडकर वादी, भीम आर्मी वाले JNU और DU में गलबहिया करते घूमते थे... चुम्मियाँ लेते थे एक दूसरे की.

फिर मोदी ने UGC रेगुलेशन लगा दी... और सभी वर्गों के बीच खाई खोद दी.... वरना पहले तो कोई भेद था ही नहीं.... ये आरक्षण, SC ST एक्ट आदि तो मजाक के लिए लाये गए थे.

कुछ सुना सुना सा लगता है ना.

ऐसा ही लॉजिक वो देते हैं.. जो कहते हैं कि 2014 के बाद माहौल ख़राब हो गया.. पहले हिन्दू मुस्लिम साथ रहा करते थे.. मोदी ने आ कर सब बिगाड़ दिया.

हाँ जी.. वह भी सच था..... हम सब इतने प्यार से रहा करते थे..... पाकिस्तान और बांग्लादेश तो हमने पुगम पुगाई करने के लिए बाँटा था.. खेल खेल में... वहाँ कोई मनभेद या मतभेद थोड़ी था.

अब आप पूछेंगे कि यह गाजियाबाद गैंग क्या है?

उस पर भी लिखेंगे.
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रूचि त्रिपाठी पर हमला हुआ.

बेहद गलत हुआ.

शोर मचाया जा रहा है कि ब्राह्मण पर हमला हुआ.

सही बात है.

किसने करवाया?

लेफ्ट वालों ने.. भीम आर्मी वालों ने.

उनके नाम आने दीजिये सामने... आएंगे ही.

अगर हिंसा करने वाले भी सवर्ण ही निकले तो फिर कैसे डिफेंड करेंगे?

कुछ दिनों पहले JNU में ब्राह्मणों के खिलाफ एक रैली निकाली गई थी.... उसमे ब्राह्मणों और सवर्णों को गालियां दी गई थी.

JNU प्रशासन ने उन सबको Suspend कर दिया है.

ब्राह्मणों और सवर्णों को गाली देने वाले अधिकांश किस जाति और वर्ग के थे.... ज़रा google करके जान लीजिये.
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कैलाश रेंज पर टैंक चढ़ गए.
पंगोंग त्सो पर चीनी आ गए
गलवान में चीनी घुस गए.
चीन हमारे देश में हजारों किलोमीटर घुस आया

अरे क्यों हुआ यह सब??
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कल DU में एक महिला पत्रकार के साथ लेफ्ट वालों ने हाथापाई की.

ग़ाज़ियाबाद गैंग के अनुसार मोदी इसके दोषी हैं.

आज छात्रों ने इस मामले पर हल्ला किया हुआ है.. Protest हो रहे हैं.. थाने घेरे जा रहे हैं... महिला पत्रकार के समर्थन में लोग जुट रहे हैं.

कौन खड़ा है उस महिला पत्रकार के साथ?

NSUI, AISA, ASAP, CYSS, SFI या AISF???

सिर्फ एबीवीपी खड़ी है.

क्या बाकि छात्र Wing में सवर्ण नहीं? महिला नहीं हैं?

सबमे हैं... सबकी Leadership सवर्ण ही है.... वो क्यों खड़े नहीं हुए?

कल रूचि पर हमला करने वालों में महिलाये भी थी.

आज केवल एबीवीपी के लोग... जिसमे सवर्ण, पिछड़े, महिला, दिव्यांग.. सभी हैं.. सब खड़े है रूचि के साथ.

लेकिन दोषी सिर्फ मोदी है.... क्यों.. क्यूंकि किसी ने कहा है ऐसा.. इसलिए है
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सवर्णों को जाति जाति ही खेलना है ना.

लीजिये एक उदाहरण.

क्या किया जाए ऐसो का?

इसके लिए भी मोदी को दोष देना है?

और ऐसे भरे पड़े हैं हमारे समाज में.
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Congress on Backfoot - After dragging Hardeep Singh Puri’s name for 3 days, Cong ADMITS, His name does NOT appear in any wrong-doing🙄
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Cochin Shipyard Set to Secure 6,000 Crore Indian Navy Survey Vessel Contract in Competitive Bid
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Name of the assaulters of Female Journalist in DU

1. Neha Bora (National President of AISA & Ph.D scholar at SAA, JNU)

2. Anjali Kumari (Presidential candidate of AISA-SFI alliance in DUSU Election 2025)

3. Gurkirat (President of Bhagat Singh Chhatra Ekta Manch-DU)

4. Prof. Jitendra Meena (Assistant Professor at Shyam Lal College of DU)

5. Members of AISA, SFI

All these should immediately be arrested and legally prosecuted.
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भारत में रुचि तिवारी (Ruchi Tiwari) का नाम इस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में हुई एक हिंसक घटना की वजह से चर्चा में है। यह मामला सोशल मीडिया पर काफी तेज़ी से वायरल हो रहा है।
मामले की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
घटना क्या है?
* हमला: 12 फरवरी 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी के आर्ट्स फैकल्टी में एक महिला पत्रकार रुचि तिवारी के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। रुचि तिवारी 'ब्रेकिंग ओपिनियन' (Breaking Opinion) नामक एक यूट्यूब न्यूज़ चैनल से जुड़ी हैं।
* वजह: रुचि तिवारी वहां यूजीसी (UGC) के जाति संबंधी नियमों के विरोध में हो रहे एक प्रदर्शन को कवर करने गई थीं। खबरों के अनुसार, जब उन्होंने प्रदर्शनकारियों से तीखे सवाल पूछे, तो भीड़ उत्तेजित हो गई।
* जातिगत एंगल: कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि भीड़ तब और हिंसक हो गई जब उन्हें पत्रकार का सरनेम 'तिवारी' पता चला। आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें अपमानित करने की कोशिश की गई।
वर्तमान स्थिति
* सोशल मीडिया पर ट्रेंड: ट्विटर (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर रुचि तिवारी के समर्थन में अभियान चल रहा है। लोग महिला सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
* संगठनों की प्रतिक्रिया: एबीवीपी (ABVP) जैसे छात्र संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और वामपंथी छात्र संगठनों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
* पुलिस कार्रवाई: मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की थी, और बाद में कुछ लोगों को हिरासत में लेने की खबरें भी सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें पत्रकार मदद के लिए चिल्लाती हुई दिखाई दे रही हैं, जिसने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
इस मामले में अब तक की ताज़ा जानकारी और कानूनी कार्यवाही के मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:
1. पुलिस और एफ़आईआर (FIR):
घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने रुचि तिवारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया था। इसमें आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मारपीट, सार्वजनिक रूप से महिला का अपमान और जानबूझकर चोट पहुँचाने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को सबूत के तौर पर अपने कब्ज़े में लिया है।
2. मुख्य आरोपी और गिरफ्तारियां:
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली है जो वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं। कुछ छात्रों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का पक्ष यह है कि पत्रकार के सवाल उकसाने वाले थे, लेकिन कानूनन किसी भी आधार पर शारीरिक हिंसा को गलत माना जा रहा है।
3. रुचि तिवारी का बयान:
रुचि तिवारी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल और वीडियो इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें जानबूझकर उनके सरनेम (तिवारी) की वजह से निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बाल खींचे गए और उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं। वह इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रही हैं।
4. राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:
* मीडिया जगत: कई पत्रकारों और न्यूज़ पोर्टल्स ने इसे 'प्रेस की स्वतंत्रता' पर हमला बताया है।
* छात्र राजनीति: दिल्ली विश्वविद्यालय में तनाव का माहौल है। एबीवीपी (ABVP) ने इस घटना के विरोध में मार्च निकाला है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी छात्र गुटों का कहना है कि यह मामला केवल एक झड़प थी जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
5. विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख:
डीयू (DU) प्रशासन ने एक आंतरिक जांच कमेटी गठित की है जो यह देखेगी कि आर्ट्स फैकल्टी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में कहाँ चूक हुई और क्या इसमें शामिल लोग विश्वविद्यालय के छात्र हैं या बाहरी तत्व।
इस मामले में हालिया कानूनी और प्रशासनिक अपडेट निम्नलिखित हैं:
1. पुलिस की कार्रवाई और FIR:
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में IPC की विभिन्न धाराओं (जैसे धारा 323 - स्वेच्छा से चोट पहुँचाना, 354 - महिला की लज्जा भंग करना, और 506 - आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने घटनास्थल के वायरल वीडियो और CCTV फुटेज को मुख्य साक्ष्य (Evidence) के रूप में लिया है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।
2. गिरफ्तारियां और पहचान:
ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। रुचि तिवारी ने आरोप लगाया है कि उन पर हमला करने वाले लोग एक विशिष्ट विचारधारा वाले छात्र संगठनों से जुड़े थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह हमला पूर्व-नियोजित (Pre-planned) था या मौके पर हुई बहस का नतीजा।
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3. रुचि तिवारी का पक्ष:
रुचि तिवारी ने अपने हालिया बयानों में कहा है कि यह केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि एक 'महिला' और उसकी 'पहचान' पर हमला था। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन चोटों के निशान भी दिखाए हैं जो उन्हें धक्का-मुक्की के दौरान आई थीं। उनका कहना है कि वे इस मामले को तब तक नहीं छोड़ेंगी जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।
4. विश्वविद्यालय (DU) का रुख:
दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एक आंतरिक जांच समिति (Internal Inquiry Committee) का गठन किया है। प्रशासन यह जांच रहा है कि आर्ट्स फैकल्टी जैसे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कैसे फेल हुई और क्या इसमें शामिल लोग बाहरी थे या विश्वविद्यालय के ही छात्र।
5. बढ़ता राजनीतिक रंग:
इस मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। एक तरफ ABVP और दक्षिणपंथी संगठन इसे 'एक ब्राह्मण महिला पत्रकार पर हमला' बताकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी संगठनों का कहना है कि पत्रकार का व्यवहार पक्षपाती था और यह केवल एक तीखी बहस थी जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति:
फिलहाल आर्ट्स फैकल्टी के बाहर पुलिस बल तैनात है और सोशल मीडिया पर #JusticeForRuchiTiwari जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कोर्ट में पेशी और पुलिस की चार्जशीट से स्थिति और साफ होगी।
जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नक्सलवादी तत्व हावी हैं। सरकार को जेएनयू में भी सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहिए। अराजकतावादी नक्सलवादी सोच के लोगों को जेएनयू से बाहर कर देना चाहिए।

जातिगत उन्माद भड़का कर देश में उपद्रव करने के षड्यंत्रों की भूमिका जेएनयू में रची जा रही है। खुले आम जातियों का नाम लेकर गालियां दीं जा रहीं।समय रहते ऐसे अराजक तत्वों का दमन करना होगा।

इस मामले में एक तथ्य पर और ध्यान देना होगा कि उपद्रवियों की नेता अदिति मिश्रा है। अर्थात कथित ब्राह्मण के नेतृत्व में ब्राह्मण का विरोध हो रहा है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की वर्तमान निर्वाचित अध्यक्ष अदिति मिश्रा हैं।

अदिति मिश्रा से संबंधित मुख्य जानकारियां निम्नलिखित हैं:
चुनावी जीत: उन्होंने नवंबर 2025 में हुए जेएनयू छात्र संघ चुनाव (सत्र 2025-26) में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उन्होंने एबीवीपी (ABVP) के उम्मीदवार विकास पटेल को 400 से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
संगठन: वह वामपंथी गठबंधन (Left Unity) की उम्मीदवार थीं और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी हैं।
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जो कहते थे भाजपा ने नुपुर को मरने के लिए छोड़ दिया था.
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रजत शर्मा पर गाली देने के आरोप लगाये वो आरोप झूठे थे -कोर्ट
पवन खेड़ा, रागिनी नायक ओर जयराम रमेश के खिलाफ नोटिस जारी
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फिलहाल दिल्ली यूनिवर्सिटी के वामपंथी और भीमटो को पुलिस पकड़ कर Treatment दे रही है.

केवल एक ही दल खड़ा हुआ है... ABVP.
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सभी को महाशिवरात्रि पर्व की बहुत बहुत शुभकामनायें 🙏
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