माँ❤️
बाजरों में घूमते हुए एक कोने पर नज़र मेरी पड़ी।
उदासियों से तपी हुई धूप में एक बूढ़ी माँ थी खड़ी।
नज़र पड़ी, मेरे हाथ पर मेरी,दोपहर दो बजा रही थी घड़ी।
मैं जा पहुँचा वहीं समीप,जहां वो बूढ़ी मां थी खड़ी।
कहने लगी मुझसे वो माँ, जीवन मे है संकट की घड़ी।
बेटी थी मैं कभी अपने घर की सबसे बड़ी।
मैंने कहा आइए आपको सड़क उस पार कर देता हूँ।
मग़र वो वही खड़े रहने की ज़िद पर थी अड़ी।
हर रोज़ उस समय, बेटा उसका वहाँ से है गुजरता।
उसे देखने हर रोज़, वो माँ होती है वहाँ खड़ी।
खुशियों का देहांत करके उदासियों में एक माँ अपने बच्चों के लिए वहां खड़ी।
मेरी आँखों ने नमी भरी और महससू किया क्यों होती है माँ इस जगत में सबसे बड़ी!
~अभिराइट्स❤️ 🪶
बाजरों में घूमते हुए एक कोने पर नज़र मेरी पड़ी।
उदासियों से तपी हुई धूप में एक बूढ़ी माँ थी खड़ी।
नज़र पड़ी, मेरे हाथ पर मेरी,दोपहर दो बजा रही थी घड़ी।
मैं जा पहुँचा वहीं समीप,जहां वो बूढ़ी मां थी खड़ी।
कहने लगी मुझसे वो माँ, जीवन मे है संकट की घड़ी।
बेटी थी मैं कभी अपने घर की सबसे बड़ी।
मैंने कहा आइए आपको सड़क उस पार कर देता हूँ।
मग़र वो वही खड़े रहने की ज़िद पर थी अड़ी।
हर रोज़ उस समय, बेटा उसका वहाँ से है गुजरता।
उसे देखने हर रोज़, वो माँ होती है वहाँ खड़ी।
खुशियों का देहांत करके उदासियों में एक माँ अपने बच्चों के लिए वहां खड़ी।
मेरी आँखों ने नमी भरी और महससू किया क्यों होती है माँ इस जगत में सबसे बड़ी!
~अभिराइट्स
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❤13👍2🔥2
ये कैसा ख्याल है तेरा, जो मेरा हाल बदल देता है
तू दिसम्बर की तरह है, जो पूरा साल बदल देता है..!
~🪶
तू दिसम्बर की तरह है, जो पूरा साल बदल देता है..!
~
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❤16
कर्तव्यों के उगते सूरज सा तू
और दिन भर की थकान के बाद सुकून भरी रात सी मैं,
हम मिलेंगे क्षण भर, एक पहर
किसी शाम की तरह .... ❤️
और दिन भर की थकान के बाद सुकून भरी रात सी मैं,
हम मिलेंगे क्षण भर, एक पहर
किसी शाम की तरह .... ❤️
❤13👍2
रंजिशें ज़माने से भी होंगी बेशक
मगर
पहले मेरी खुद से लड़ाई तो ख़त्म हो ...🍂
मगर
पहले मेरी खुद से लड़ाई तो ख़त्म हो ...🍂
❤19👍3
मैं तुम्हें फिर मिलूंगी ,
इस बार तुम्हारी सी हो के...
तुम फ़िक्र बनना
मैं मिलूंगी इम्तिहान बनके
तुम ज़िक्र बनना
मैं मिलूंगी तुम्हारी जान बनके
तुम बनना समंदर
मैं मिलूंगी गहराई बेहिसाब बनके
तुम बनना रात अंधेरी
मैं मिलूंगी तुम्हे मेहताब बनके
ये दूरी बस इस एक ज़िंदगी निभानी है
तुम बनना क़िस्मत फिर
मैं मिलूंगी तुम्हे मेहरबानी बनके
ग़ज़ल के आख़िर में ,
मैं यही कहूंगी , तुम जो पढ़ रहे हो आज मुझे यूं खो के
मैं तुम्हें फिर मिलूंगी
इस बार तुम्हारी सी हो के....❤️
इस बार तुम्हारी सी हो के...
तुम फ़िक्र बनना
मैं मिलूंगी इम्तिहान बनके
तुम ज़िक्र बनना
मैं मिलूंगी तुम्हारी जान बनके
तुम बनना समंदर
मैं मिलूंगी गहराई बेहिसाब बनके
तुम बनना रात अंधेरी
मैं मिलूंगी तुम्हे मेहताब बनके
ये दूरी बस इस एक ज़िंदगी निभानी है
तुम बनना क़िस्मत फिर
मैं मिलूंगी तुम्हे मेहरबानी बनके
ग़ज़ल के आख़िर में ,
मैं यही कहूंगी , तुम जो पढ़ रहे हो आज मुझे यूं खो के
मैं तुम्हें फिर मिलूंगी
इस बार तुम्हारी सी हो के....❤️
❤12👍2🥰2🎉1
ज़माना भर देखने पर भी मेरे जहन से ये इरादे नहीं जाते
आम सी लड़की हूं मैं ,
और आम सी लड़कियों के लिए शहजादे नहीं आते ..... 🌙
आम सी लड़की हूं मैं ,
और आम सी लड़कियों के लिए शहजादे नहीं आते ..... 🌙
❤5👍4💔2🥰1😁1
गर तुम चाहो, तो मरने से पहले एक बार जी जाउ मैं!
~अभिराइट्स🪶
~अभिराइट्स
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❤5❤🔥4💔2🔥1
ये जो आंखो में तुम ख्वाब लिए फिरते हो,
ये जो नासमझी से भरे चंद जवाब लिए फिरते हो!
देखना एक दिन तुम्हे वीरान कर देगी,
ये मोहब्बत में, जिसके लिए तुम गुलाब लिए फिरते हो!
~❤️ ♾
ये जो नासमझी से भरे चंद जवाब लिए फिरते हो!
देखना एक दिन तुम्हे वीरान कर देगी,
ये मोहब्बत में, जिसके लिए तुम गुलाब लिए फिरते हो!
~
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❤9🔥3👏2🤩1
तेरी किताब में एक नाम महज़ हूं मैं
तो मैं तुझे एक कहानी बनने की मोहलत क्यूं दूं ,
दो कश लगाऊं और भूल जाऊं तुझे.... ?
खैर ! मैं तुझे इतना भी वक्त क्यूं दूं .... 🍁
तो मैं तुझे एक कहानी बनने की मोहलत क्यूं दूं ,
दो कश लगाऊं और भूल जाऊं तुझे.... ?
खैर ! मैं तुझे इतना भी वक्त क्यूं दूं .... 🍁
🔥14
व्यर्थ करते हो अभिमान अपने पौरुष पर,
नारी 'शक्ति' बल से नहीं समर्पण से रीझती है!
सुप्रभात🌼
~🌟 ✨
नारी 'शक्ति' बल से नहीं समर्पण से रीझती है!
सुप्रभात🌼
~
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❤6💯3👏2🔥1
Forwarded from 💓सुकूँन 💓 (~अभिमंद ᥫ᭡፝֟፝֟)
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कभी शिद्दत से गर्मी, कभी बारिश की फुहारें ,
ये मई महीना, ये मोहब्बत, समझ से बाहर है हमारे!
~🏃♂️
ये मई महीना, ये मोहब्बत, समझ से बाहर है हमारे!
~
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❤9🥰3👏1🤩1💯1
ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜 pinned «मैं तुम्हें फिर मिलूंगी , इस बार तुम्हारी सी हो के... तुम फ़िक्र बनना मैं मिलूंगी इम्तिहान बनके तुम ज़िक्र बनना मैं मिलूंगी तुम्हारी जान बनके तुम बनना समंदर मैं मिलूंगी गहराई बेहिसाब बनके तुम बनना रात अंधेरी मैं मिलूंगी तुम्हे मेहताब बनके ये दूरी बस…»
कतरा कतरा अपनी रूह का यूं न जलाइए ,
ज़िंदगी का जो हिस्सा रहा है अब उसे बचाइए ,
मेरी बात मानिए
आप उसे भूल जाइए ..... 🍂
ज़िंदगी का जो हिस्सा रहा है अब उसे बचाइए ,
मेरी बात मानिए
आप उसे भूल जाइए ..... 🍂
👍5❤4
Forwarded from *Innocent Girl*
इनायत फ़रमा ऐ... ख़ुदा...
अब मौत दे दे या... उसे मेरा कर दे...!!
अब मौत दे दे या... उसे मेरा कर दे...!!
💔8❤1
न तेरी कहानी है ,न किरदार है तेरे!
मसरूफियती ज़िंदगी में, आप इतवार है मेरे!
~अभिराइट्स🪶 ⭐
मसरूफियती ज़िंदगी में, आप इतवार है मेरे!
~अभिराइट्स
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❤7👍6🔥3🤩1
मई की सुस्त दोपहरियों में तेरे कांधे पे यूं गिरना
हाये!
ऐसी नजदीकियों पे सौ सौ रातें कुर्बान 🫠
हाये!
ऐसी नजदीकियों पे सौ सौ रातें कुर्बान 🫠
❤12🔥2🥰1
किताब के जो पन्ने गुम है बीच के ,
शायद उन पे हमारा मिलना लिखा था...🖇
शायद उन पे हमारा मिलना लिखा था...🖇
💔5❤4🥰1
ख़्वाब खयाल में रखा मैंने जिसे , हकीकत में उसे आना नहीं है
बिखरा बिखरा सा कमरा पड़ा है, खैर!
दिल भी उसे सजाना नहीं है
हर रात रोती हूं मैं, उसके ज़रा से साथ को भी
मुमकिन है, कोई ले मेरा नाम उसके सामने
और वो कहे ,
कौन ...? मैंने पहचाना नहीं है 🥲
बिखरा बिखरा सा कमरा पड़ा है, खैर!
दिल भी उसे सजाना नहीं है
हर रात रोती हूं मैं, उसके ज़रा से साथ को भी
मुमकिन है, कोई ले मेरा नाम उसके सामने
और वो कहे ,
कौन ...? मैंने पहचाना नहीं है 🥲
❤9
कब कहाँ किसी हकीम से इश्क़ का मर्ज़ सुधरता है;
मुहब्ब्त की सीढियां जो चढ़ता है वही उतरता है!
~⭐ 🩷
मुहब्ब्त की सीढियां जो चढ़ता है वही उतरता है!
~
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❤🔥8🔥4❤2🤩1
एक तरफ़ का तूफ़ान नहीं , दो हिस्सों की बरसात आती
उसकी हंसी से गूंजती लंबी रात आती ,
काश! ये इश्क़ मेरा बस कागज़ी ना रहता ,
मेरी मोहब्बत में भी एक मुलाकात आती..... 💐🌈
उसकी हंसी से गूंजती लंबी रात आती ,
काश! ये इश्क़ मेरा बस कागज़ी ना रहता ,
मेरी मोहब्बत में भी एक मुलाकात आती..... 💐🌈
❤12