कभी पिता होकर घर की छत बने
कभी प्रेम में रहकर फिर बच्चे बने
कभी बेटा होकर सपनों से समझौता किया
कभी जिम्मेदारियों का बस्ता उम्र से पहले कंधों पर लिया
कभी लड़े जंग के मैदान में डटकर
कभी हार गए लड़ाई अपनो की खातिर
कभी तेज़ बरसात में गाड़ी चलाते
कभी हॉस्पिटल में मरीज़ को दिन रात संभालते
कभी लाइनों में धक्के खाकर टिकट कटवाते
कभी बसों में अपनी सीट देकर घंटों खड़े रह जाते
इन पुरुषों ने निरंतर वे सभी ज़रूरी किरदार निभाए
जहां ज़रूरत थी , थककर कुछ देर बैठ जाने की
~ Aishwarya Sharma
( जाना ज़रूरी है क्या )
Happy international man's day
And thankyou so much to all men in my life. ❤️
कभी प्रेम में रहकर फिर बच्चे बने
कभी बेटा होकर सपनों से समझौता किया
कभी जिम्मेदारियों का बस्ता उम्र से पहले कंधों पर लिया
कभी लड़े जंग के मैदान में डटकर
कभी हार गए लड़ाई अपनो की खातिर
कभी तेज़ बरसात में गाड़ी चलाते
कभी हॉस्पिटल में मरीज़ को दिन रात संभालते
कभी लाइनों में धक्के खाकर टिकट कटवाते
कभी बसों में अपनी सीट देकर घंटों खड़े रह जाते
इन पुरुषों ने निरंतर वे सभी ज़रूरी किरदार निभाए
जहां ज़रूरत थी , थककर कुछ देर बैठ जाने की
~ Aishwarya Sharma
( जाना ज़रूरी है क्या )
Happy international man's day
And thankyou so much to all men in my life. ❤️
❤7
.... और तुम वो लड़के हो , जिसे रखा जाना चाहिए संभालकर ,
संवार कर , प्यार कर , नज़रें उतार कर
जिनका ज़िक्र नहीं किया गया किसी कहानी में
जिन्होंने निभाये रिश्ते , प्रेम हार कर
जिन्हें फ़िक्र रही मां की , घर की ,
जिन्हें ज़मीनें मिली शहर दर शहर की
जिन्हें यादें बीते ज़माने की बेहिसाब रही
मैं न रही गले लगाने को तो शराब रही
संजोकर रखा जाना चाहिए तुम्हारी इस हंसी को
झुमके , बिंदी और दुपट्टा ... सब तुम्हारी खुशी को
तुम वो लड़के हो जिसके साथ के लिए लड़ा जाना चाहिए ,
जिसे जीता जाना चाहिए दुनिया जहां हार कर
जिसे रखा जाना चाहिए बाहों में संभालकर ❤️
संवार कर , प्यार कर , नज़रें उतार कर
जिनका ज़िक्र नहीं किया गया किसी कहानी में
जिन्होंने निभाये रिश्ते , प्रेम हार कर
जिन्हें फ़िक्र रही मां की , घर की ,
जिन्हें ज़मीनें मिली शहर दर शहर की
जिन्हें यादें बीते ज़माने की बेहिसाब रही
मैं न रही गले लगाने को तो शराब रही
संजोकर रखा जाना चाहिए तुम्हारी इस हंसी को
झुमके , बिंदी और दुपट्टा ... सब तुम्हारी खुशी को
तुम वो लड़के हो जिसके साथ के लिए लड़ा जाना चाहिए ,
जिसे जीता जाना चाहिए दुनिया जहां हार कर
जिसे रखा जाना चाहिए बाहों में संभालकर ❤️
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Forwarded from 💓सुकूँन 💓 (~अभिमंद ᥫ᭡፝֟፝֟)
क्यों पुरुष की पीड़ा को ,उसके फर्ज का नाम दिया जाता है !
क्यों पुरुषों को रोने नहीं दिया जाता है!
क्यों कहते हैं की पुरुष सख्त होते हैं
क्या पुरुषों के दो दो मस्तक होते हैं!
क्यों कहते है पुरुष घर नहीं बनाते है,
क्या दूर रहकर आप ईश्वर नहीं सजाते है!
जहां ने पुरुषों को एकतरफ ला दिया है,
जिसको इज़्ज़त दी उसी ने खा लिया है!
पुरुषों ने प्रेम का मतलब समझाया है,
बेशक़ कोई दूर हो,नाराज़ हो,खामोश हो, पुरुषों ने ही पहले मसला सुलझाया है!
अगर जहाँ में ,पुरूष कौरव हो सकते है,
वही सती अनुसुइया का गौरव हो सकते है!
Happy men's day
~अभिमंद🩵
क्यों पुरुषों को रोने नहीं दिया जाता है!
क्यों कहते हैं की पुरुष सख्त होते हैं
क्या पुरुषों के दो दो मस्तक होते हैं!
क्यों कहते है पुरुष घर नहीं बनाते है,
क्या दूर रहकर आप ईश्वर नहीं सजाते है!
जहां ने पुरुषों को एकतरफ ला दिया है,
जिसको इज़्ज़त दी उसी ने खा लिया है!
पुरुषों ने प्रेम का मतलब समझाया है,
बेशक़ कोई दूर हो,नाराज़ हो,खामोश हो, पुरुषों ने ही पहले मसला सुलझाया है!
अगर जहाँ में ,पुरूष कौरव हो सकते है,
वही सती अनुसुइया का गौरव हो सकते है!
Happy men's day
~अभिमंद🩵
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यक़ीनन तू कल नहीं होगा साथ मेरे ,
मगर आज कल को भूल जाने दे
~🦋
मगर आज कल को भूल जाने दे
~🦋
❤9😁1
ᴇʟɪxɪʀ ᴡʀɪᴛᴇꜱ 💜 pinned «.... और तुम वो लड़के हो , जिसे रखा जाना चाहिए संभालकर , संवार कर , प्यार कर , नज़रें उतार कर जिनका ज़िक्र नहीं किया गया किसी कहानी में जिन्होंने निभाये रिश्ते , प्रेम हार कर जिन्हें फ़िक्र रही मां की , घर की , जिन्हें ज़मीनें मिली शहर दर शहर की जिन्हें…»
इस खूबसूरती की शुक्रगुजार हूं मैं , मगर ये शहर नहीं है मेरा ,
आसरा है चार दीवारों और एक छत का , मगर सुकून नहीं है, ये घर नहीं है मेरा 🥺
आसरा है चार दीवारों और एक छत का , मगर सुकून नहीं है, ये घर नहीं है मेरा 🥺
❤8👏2
सौ पल ग़ुज़ारे है उसके बगैर मैंने ,
जाने कितनी हज़ार याद के बाद आया है ,
सीने से लगाया मैंने , हाल पूछा है , खयाल पूछा है
मेरे दर पर आज मेरा चांद आया है .... 💜🐸🦋
जाने कितनी हज़ार याद के बाद आया है ,
सीने से लगाया मैंने , हाल पूछा है , खयाल पूछा है
मेरे दर पर आज मेरा चांद आया है .... 💜🐸🦋
❤10👍1
मेरी तकदीर में सुबह नहीं..शाम लिखा है,
हर लफ्ज़ ग़ज़ल का तुम्हारे नाम लिखा है,
लोग बस दाद देंगे,मगर तुम गौर से पढ़ना,
लफ़्ज़ों के लिबास में तुम्हे पैगाम लिखा है।।
~❤️
हर लफ्ज़ ग़ज़ल का तुम्हारे नाम लिखा है,
लोग बस दाद देंगे,मगर तुम गौर से पढ़ना,
लफ़्ज़ों के लिबास में तुम्हे पैगाम लिखा है।।
~
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❤8
फिर आंधियों से टकराने की तमन्ना है..
रवैया फिर से हो गया है बगावती मेरा..!
~⭐ 🩷
रवैया फिर से हो गया है बगावती मेरा..!
~
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❤10
वो शिकायतें जो मैंने की ही नहीं ,
सारी उम्र कर्ज़ रहेगी तुम पर .... 🍂
सारी उम्र कर्ज़ रहेगी तुम पर .... 🍂
❤10
चाह कर भी मेरा मोह नहीं छूटता तुमसे
मानो ,
पानी मिला हो किसी रेगिस्तान के भटके को ... 🫠
मानो ,
पानी मिला हो किसी रेगिस्तान के भटके को ... 🫠
❤9👏1
मैंने भी देखने की हद पार कर दी ,
वो भी तस्वीर से निकल आया .... ❤️🧸
वो भी तस्वीर से निकल आया .... ❤️🧸
❤8
ना हक दीजिए इतना की,तकलीफ़ हो आपको,
ना वक्त दीजिए इतना की, ग़ुरूर हो उन्हें..!!
~💗
ना वक्त दीजिए इतना की, ग़ुरूर हो उन्हें..!!
~
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❤🔥9🔥2❤1💯1
मैं नहीं कह सकती हूं कि मैं तुमसे समंदर जितना प्रेम करती हूं ,
मुझे लगता है कि समंदर में अब भी पानी कम है .... ❤️
मुझे लगता है कि समंदर में अब भी पानी कम है .... ❤️
❤7
यकीनन कमी है मुझमें,इंसान हूँ ना मैं,
तुम फरिश्ते जो ठहरे, खुद सा कहा ढूंढोगे!
~💙
तुम फरिश्ते जो ठहरे, खुद सा कहा ढूंढोगे!
~
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🔥10
ना बात रही , ना बेकरारी रही
ना शौक रहे , ना यारी रही ,
कुछ यूं खुद को हमने हर पहर बदल लिया
उसने ज़िंदगी बदल ली , हमने शहर बदल लिया .... 🌸
ना शौक रहे , ना यारी रही ,
कुछ यूं खुद को हमने हर पहर बदल लिया
उसने ज़िंदगी बदल ली , हमने शहर बदल लिया .... 🌸
🔥8❤4👏2
सर्द सवेरा,गर्म सांसे,ठंडी फिजाएं, जालिम हवाएं!
चाय तो ठीक है बस खुदा मोहब्बत से बचाए!
~🩷
चाय तो ठीक है बस खुदा मोहब्बत से बचाए!
~
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👏6😁6❤4
कुछ लोग जो हम पर मानसिक हुकूमत करते है साधारण नहीं होते। उनके प्रेम बीज धंसे होते है हमारे मन के अंतिम कोने में। ऐसे लोग कभी भूले नहीं जाते बस मन मे इधर से उधर होते है। उनकी दरारे जीवन पर्यंत चलती रहती है। और वे सदैव के लिए विद्धमान हो जाते है मन मे सबसे भीतरी कमरे में!
और कभी याद आते है पुरविया हवा के दर्द की तरह!
~Abhiwrites✅
और कभी याद आते है पुरविया हवा के दर्द की तरह!
~Abhiwrites
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❤8🔥2👏1🤩1
मैं कैसे सर्द हाथों से तुम्हारे गाल छूता था!
दिसम्बर में तुम्हें मेरी शरारत याद आयेगी!
~🌼💙
दिसम्बर में तुम्हें मेरी शरारत याद आयेगी!
~🌼
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❤9
जब भी टकरायेगी सर्द हवाएँ तुमसे , तुम्हें गरमाहट याद आयेंगीं , तुम्हें मैं याद आऊंगी ..
बूंदे सूनी ही रह जायेंगी छत की , जब बरसात आयेगी , तुम्हें मैं याद आऊंगी ...
बिन बातों की रह जायेंगी वो चार दीवारें ,
जब मुस्कुराहट यादों के साथ आयेंगी , तुम्हें मैं याद आऊंगी...
लगे रहना दिन भर दुनियादारी के कामों में तुम ,
रात को बंद कमरे में शराब आयेगी , फिर तुम्हें मैं याद आऊंगी...
एक पल में भुला दूंगा तुम्हें मैं , तुमने कहा ...
तुम आज़मा लेना , मैं दिल से नहीं जाऊंगी
तुम्हें मैं याद आऊंगी ... ❤️
बूंदे सूनी ही रह जायेंगी छत की , जब बरसात आयेगी , तुम्हें मैं याद आऊंगी ...
बिन बातों की रह जायेंगी वो चार दीवारें ,
जब मुस्कुराहट यादों के साथ आयेंगी , तुम्हें मैं याद आऊंगी...
लगे रहना दिन भर दुनियादारी के कामों में तुम ,
रात को बंद कमरे में शराब आयेगी , फिर तुम्हें मैं याद आऊंगी...
एक पल में भुला दूंगा तुम्हें मैं , तुमने कहा ...
तुम आज़मा लेना , मैं दिल से नहीं जाऊंगी
तुम्हें मैं याद आऊंगी ... ❤️
❤8🥰4❤🔥2👏1