रिश्ते दोनो ही बेह्तरीन हैं
बस मोहब्बत और दोस्ती में ये फर्क़ होता है ,
प्यार आंसू पोंछता हैं ,
और यार साथ रोता है....💜
बस मोहब्बत और दोस्ती में ये फर्क़ होता है ,
प्यार आंसू पोंछता हैं ,
और यार साथ रोता है....💜
❤10🥰2
अभी जो हम जुदा हुए तो बस ख्वाबों में मिलेंगे
रह जायेंगे सारे सवाल ठहरे हुए, हम रूठे रूठे जवाबों में मिलेंगे
पहना मैंने रंग तुम्हारी पसंद का और ले आई कुछ फूल
गुस्सा कम नहीं होता तुम्हारा
कि जान ! तुम जैसे लड़के तो नवाबों में मिलेंगे
भूलो ये नाराज़गी और हमे गले लगाओ
इसके बाद हम तुम्हें ना मयखाने की शराबों में मिलेंगे
मोहब्बत निभाना तुम आसमान की जैसे चांद से हो ,
इस ज़िंदगी के बाद हम तुम किताबों में मिलेंगे
ये रात बरसात और महक गुलमोहर सी
लौट जाओ घर जल्दी
हम सुबह सुबह ख्वाबों में मिलेंगे
~🦋
रह जायेंगे सारे सवाल ठहरे हुए, हम रूठे रूठे जवाबों में मिलेंगे
पहना मैंने रंग तुम्हारी पसंद का और ले आई कुछ फूल
गुस्सा कम नहीं होता तुम्हारा
कि जान ! तुम जैसे लड़के तो नवाबों में मिलेंगे
भूलो ये नाराज़गी और हमे गले लगाओ
इसके बाद हम तुम्हें ना मयखाने की शराबों में मिलेंगे
मोहब्बत निभाना तुम आसमान की जैसे चांद से हो ,
इस ज़िंदगी के बाद हम तुम किताबों में मिलेंगे
ये रात बरसात और महक गुलमोहर सी
लौट जाओ घर जल्दी
हम सुबह सुबह ख्वाबों में मिलेंगे
~🦋
❤6🥰1
मेरी नीम जैसी जिंदगी को शहद कर दे
कोई मुझे इतना चाहे, के बस हद कर दे...😌💫
कोई मुझे इतना चाहे, के बस हद कर दे...😌💫
❤7
वो इतना मिला ही नहीं कि मुझे ग़ुरूर हो जाये ,
उसने मुझे छुआ ही नहीं कि कोई सुरूर हो जाये ,
आरज़ू मेरी भी थी उसे सीने से लगाने की ,
मगर किस्मत चाहती थी कि वो बस दिखे और दूर हो जाये ... 🌸🎀🩷
उसने मुझे छुआ ही नहीं कि कोई सुरूर हो जाये ,
आरज़ू मेरी भी थी उसे सीने से लगाने की ,
मगर किस्मत चाहती थी कि वो बस दिखे और दूर हो जाये ... 🌸🎀🩷
❤13
बेनाम से मोहब्बत भरे खत पड़े हैं संदूक में ,
जो तू हां करदे , तो
नाम लिख दूं ।। 🪄
जो तू हां करदे , तो
नाम लिख दूं ।। 🪄
❤7
थक जाना दुनियां की महफ़िलों से तो!
आवाज देना मैं अकसर अकेला ही रहता हूँ!
~अभिराइट्स
आवाज देना मैं अकसर अकेला ही रहता हूँ!
~अभिराइट्स
❤11
उसके पंखों की,मैं ताकत हूँ!
हर सुबह ,उसकी बाहों की आदत हूँ!!
~अभिराइट्स🩵
हर सुबह ,उसकी बाहों की आदत हूँ!!
~अभिराइट्स🩵
❤7
बांध लिया खुद को शर्तों के धागों में मैंने
फिर मैं चाहतों भरी नींद कभी सोया ही नहीं
इस कदर पाया है मैंने उसे
कि पाया ही नहीं और कभी खोया ही नहीं 🍂
फिर मैं चाहतों भरी नींद कभी सोया ही नहीं
इस कदर पाया है मैंने उसे
कि पाया ही नहीं और कभी खोया ही नहीं 🍂
❤7
सब कुछ खोने के बाद इंसान यूं इतराता है,
मानो सब कुछ पा लिया हो .... ❤️
मानो सब कुछ पा लिया हो .... ❤️
❤10
मैंने पढ़ी है तुम्हारी वो खामोशी जो किसी और के हक़ से आयी है!
मैंने समझा है उस दर्द को जो मेरे हिस्से में न जाने कैसे आ गया!
वक़्त के सहारे, नदियों के किनारे, कभी किसी शाम,
तुम्हें रूबरू कराऊंगा उस सुकूँन से,
जो आज तक तुमने सिर्फ किताबों के पन्नों पर पाया है!
विरासत में मिले इस प्रेम के बारीक भावों से परिचित रहकर भी तुम्हारा यूं अंजान बनना भी कभी कभी मुझे तुमसे कोसों दूर ले जाता है!
अभिराइट्स⭐️
मैंने समझा है उस दर्द को जो मेरे हिस्से में न जाने कैसे आ गया!
वक़्त के सहारे, नदियों के किनारे, कभी किसी शाम,
तुम्हें रूबरू कराऊंगा उस सुकूँन से,
जो आज तक तुमने सिर्फ किताबों के पन्नों पर पाया है!
विरासत में मिले इस प्रेम के बारीक भावों से परिचित रहकर भी तुम्हारा यूं अंजान बनना भी कभी कभी मुझे तुमसे कोसों दूर ले जाता है!
अभिराइट्स
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❤8
Forwarded from 💓सुकूँन 💓 (~अभिमंद ᥫ᭡፝֟፝֟)
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❤6
धन्य: अस्मि भारतत्वेन
अर्थात्
भाग्य है मेरा कि मैं एक भारतीय हूं ।। 🇮🇳
Choose your country , kindness and freedom daily and not for some special days. ❤️
79 वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
अर्थात्
भाग्य है मेरा कि मैं एक भारतीय हूं ।। 🇮🇳
Choose your country , kindness and freedom daily and not for some special days. ❤️
79 वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
❤9
किसी को जानना हो कहां रहता हूं मैं,
उसे देखे उसकी आंखों में दिखता हूं मैं,
माना के वक़्त का पाबंद नहीं हूं
पर जब भी तुमसे मिलने आऊं
वक़्त से पहले पहुंचता हूं मैं,
मैं तुझ से रूठ भी जाऊं तो रूठ कर कहां जाऊंगा,
एक तू ही तो वो शख्स है जिसे घर समझता हूं मैं,
बात अगर तुम्हारी हो तो ज़मीं पे तिनके सा हूं,
अपनी अनां में वैसे तो पर्वत से ऊंचा दिखता हूं मैं,
सोचता हूं अब उसे भुला दूंगा
यह सोच सोच कर हमेशा उसे याद करता रहता हूं मैं,
ज़िक्र जब उसका होता है तो मेरी आंखों में चमक आ जाती है,
सब मेरे चेहरे से जान जाते हैं उसका क्या लगता हूं मैं।
~⭐ 🌼🩷
उसे देखे उसकी आंखों में दिखता हूं मैं,
माना के वक़्त का पाबंद नहीं हूं
पर जब भी तुमसे मिलने आऊं
वक़्त से पहले पहुंचता हूं मैं,
मैं तुझ से रूठ भी जाऊं तो रूठ कर कहां जाऊंगा,
एक तू ही तो वो शख्स है जिसे घर समझता हूं मैं,
बात अगर तुम्हारी हो तो ज़मीं पे तिनके सा हूं,
अपनी अनां में वैसे तो पर्वत से ऊंचा दिखता हूं मैं,
सोचता हूं अब उसे भुला दूंगा
यह सोच सोच कर हमेशा उसे याद करता रहता हूं मैं,
ज़िक्र जब उसका होता है तो मेरी आंखों में चमक आ जाती है,
सब मेरे चेहरे से जान जाते हैं उसका क्या लगता हूं मैं।
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❤7🔥3👏2❤🔥1🤩1
Forwarded from 💓सुकूँन 💓 (~अभिमंद ᥫ᭡፝֟፝֟)
Media is too big
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी ❤️🔥 ⭐ ❤️ 🌼
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